[ अनार की खेती कैसे करे 2024 ] जानिए अनार के पौधे की देखभाल कैसे करें | Pomegranate Farming

Last Updated on February 6, 2024 by krishisahara

अनार का पौधा कितने दिन में फल देता है | अनार की कटिंग कौन से महीने में होती है | अनार की खेती pdf | अनार की खेती कैसे करे | अनार में फल लगने की दवा | अनार की खेती से कमाई | अनार की खेती के लिए जलवायु | अनार की खेती सबसे ज्यादा कहां होती है |

फलों में अनार एक ऐसा फल है, जिसका पुरे साल डिमांड में रहता है | सीजन में फल की खपत के आलावा कई कम्पनियां है, जो इसका जूस बनाकर पुरे साल भर अनार के गुणों को ताज़ा उपलब्ध कराती है| कृषि में अनार एक प्रकार की व्यवसायिक स्तर का फल है, जिसको शुरू से लेकर अंत तक अच्छे भाव मिलता है | अनार की खेती कम लागत से अधिक मुनाफा देने वाली फसल है जो, कम सिंचाई क्षेत्रों में भी अच्छा मुनाफा देती है|

अनार-की-खेती-कैसे-करे

आइये जानते है, अनार की खेती की सम्पूर्ण जानकारी के बारे में –

Contents

अनार का वानस्पतिक नाम-

वनस्पतिक नाम- पयुनिका ग्रेनेटम (Punica Granatum) है |

अनार की खेती कैसे करें ?

आजकल किसान अनार की बागवानी करने की और बढ़ रहे है, जिसके लिए सरकार भी इसकी खेती के लिए अच्छे पौधे और आर्थिक रूप से 25 से 75% सब्सिडी अनुदान देती है | किसानो को सबसे उत्तम सलाह यही रहेगी की इसकी बागवानी या खेती करने से पहले प्रशिक्षण और सरकारी विभाग/स्कीम की देखरेख में ही फार्म तैयार करें – जिससे आप 10 गुना तक का मुनाफा बढ़ा सकते है|

अनार की उन्नत किस्में/ वैरायटी ?

भारत में अनार मुनाफेदार खेती हेतु, लगभग 25 प्रकार की वैराईटीयां बोई जाती है | किसान अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से अनार की किस्मों का चुनाव करें, जिससे अच्छा उत्पादन होगा | प्रमुख रूप से भारत में पांच प्रकार के अनार की वैरायटी में प्रसिद्ध है, जो अनार फल उत्पादन में क्रांति लाने में कामगार साबित हुई है | अनार की प्रमुख उन्नत किस्में निम्न है-

  • ज्योति
  • अलंदी या वडकी
  • ढोलका
  • कंधारी
  • काबुल
  • मस्कटी रेड
  • पेपर शेल्ड
  • स्पेनिश रूबी
  • गणेश (जीबी I), जी 137, पी 23, पी 23,
  • मृदुला
  • बदला
  • भगवा
  • भगवा गणेश 
  • आरकाटा
  • रूबी
  • उरक्ता

अनार की खेती के लिए जलवायु एव मिट्टी ?

अनार की खेती के लिए अर्ध शुष्क और हल्की गर्म जलवायु उपयुक्त रहती है | फलों के विकास और फलों की वृद्धि के लिए समय गर्म और शुष्क जलवायु की अधिक आवश्यकता होती है | फल बनते समय तापमान 38 डिग्री सेंटीग्रेड होना उत्तम मान जाता है |

मिट्टी अर्थात भूमि की बात करें, तो अनार की खेती लगभग सभी तरह की भूमि पर की जा सकती है | अच्छी उपज और उत्पादन के लिए रेतीले और दोमट मिट्टी (अच्छी जल निकासी वाली) अति उत्तम रहती है |

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अनार की नर्सरी/अनार के पौधे कहां से लाएं ?

किसान अनार की बागवानी करने से पहले अनार की पौध की अच्छी तरह से व्यवस्था रखनी चाहिए | क्योंकि यह 30 से 40 वर्ष तक का भूमि में निवेश होता है | बात करें अनार के पौधे के बारे में तो पौधे नजदीकी कृषि विभाग की नर्सरी से एक उन्नत किस्म के पौधे प्राप्त कर सकते हैं | अनार के पौधे की कीमत लगभग 30 से 100 रुपये / पौधा के बीच में होती है | – अनार की नर्सरी

किसान चाहे तो, खुद बीज लगाकर बाद में कलम विधि द्वारा पौधे को ग्राफिट करके अनार की पौध तैयार कर सकता है |

अनार का खेत कैसे तैयार करें –

  • किसान को इसकी खेती के लिए खेत को अच्छे प्रकार से खेत की जुताई कर तैयार कर लेना चाहिए |
  • खेत अच्छी तरह से तैयार होने के बाद अनार के पौधों के लिए 5×5 मीटर (परंपरागत खेती) तथा 5×3 मीटर (सघन खेती) की दूरी पर पौधों के लिए गड्ढों को तैयार कर सकते है |
  • गड्ढों का आकार 2 फिट गहरा 2 फीट चौड़ा आकार में खोदकर 15 से 20 दिन के लिए खुला छोड़ दें |
  • खुला छोड़ने से गड्ढों की आंतरिक सतह की मिट्टी अच्छी तरह पक जाए |
  • अब किसान को हर गड्ढों में 10 से 15 किलो कंपोस्ट खाद नीचे सतह की मिट्टी में मिला कर गड्ढों को भर दे |
  • अंत मे किसान को अनार के पौधे लगाकर ऊपर की सामान्य मिट्टी के भरकर पौधों मे सिंचाई कर दे |

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अनार की रोपाई का समय ?

बाग या अनार का पौधा लगाने का उचित समय फरवरी-मार्च तथा खरीफ सीजन में जुलाई या अगस्त का महीना सबसे अच्छा रहता है | 

अनार की सिंचाई ?

  • खेती में सिंचाई की बात करें, तो 10 से 15 दिन के अंतराल में करनी चाहिए |
  • वर्षा ऋतु में आवश्यकता होने पर ही पौधों में सिंचाई करें |
  • अनार के पौधों में सिंचाई के लिए बूंद-बूंद सिंचाई यानी ड्रिप सिंचाई उपयुक्त रहती है |

अनार के पौधे की देखभाल कैसे करें?

बागवानी करने वाले किसानों को अनार के हर एक पौधो में मकड़ी जाला, पौधो में बढवार रुकना, डालियों का सूखना, पत्तियों का पीलापन, सिंचाई की मांग और समय, मिटटी की पल्टी, निराई-गुड़ाई, फूलों का झड़ना, फलों का न बनना, तोता-चिड़िया-चूहा आदि जीव-किट का लगना आदि सावधानियों के प्रति सचेत रहना चाहिए |

इन सभी प्रकार की सावधानियों की देखभाल करना सरल है, जिनके लिए अलग-अलग तरीके, दवा का प्रयोग कर सकते है |

अनार के पौधों की कटाई-छटाई –

बात करें इन की निराई-गुड़ाई, देखभाल समय-समय पर करते रहना चाहिए | अनार के पौधों की भूमि की सतह से दो से तीन मुख्य तने ही रखनी चाहिए, बाकी की टहनियों को काट देना चाहिए | अनार के पौधों की कटाई-छटाई से पौधों की गुणवत्ता में वृद्धि होती है तथा उत्पादन में भी वृद्धि अधिक होती है |

अनार में कीट प्रबंधन/रोकथाम –

  • फलों तथा पौधों को खेतों से तथा रोगों से बचाने के लिए पौधों में जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें |
  • जैविक कीटनाशकों में नीम तथा धतूरे से बने तरल कीटनाशक का छिड़काव करें |
  • छिड़काव 15 से 20 दिनों के अंतराल में तीन से चार बार करें |
  • अनार की खेती में रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए हो सके तो कम करें |
  • रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग किसान को कृषि विशेषज्ञ की पूछताछ या देखरेख में करना चाहिए |
  • रसायन कीटनाशक जिसमें मुख्य है, मेलाथियान तथा फैरामन ट्रेप रसायन का प्रयोग करें |

अनार के भाव/अनार की खेती से कमाई ?

भारतीय बाजारों में अनार के भावों की बात करें तो अनार का वर्तमान बाजार भाव ₹40 से लेकर ₹100 के बीच है | तथा किसानों को उनकी फसल के अनुसार मंडियों में भी अच्छे भाव मिल जाते है इसके जो औसतन 40 से ₹60 के बीच होते है |

(नोट:- किसी भी फल-फ्रूट के भाव मौसम, बाजार, मांग पर निर्भर करता है)

वैसे आपको बता दे की महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश के कई बागवानी करने वाले किसान लाखों में मुनाफा कमा रहे है |

अनार-की-खेती-कैसे-करे

अनार में फल लगने की दवा?

फल लगने और फुल झड़ने से रोकने के लिए – 3 मिली फ्लोनोफिक्स को 20 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव कर सकते है | समय से सिंचाई का ध्यान रखना और पौधो की जड़ों में पक्की हुई गोबर खाद एव बोरोन दवा दे |

अनार के फल को फटने से कैसे बचाएं ?

पोषक तत्वों की कमी के कारण अनार के फल फटने की समस्या पैदा शुरू हो जाती है जिसका निवारण किसान भाई – खाद बीज का सही मात्रा में उपयोग करना और सिंचाई भी एक समान अन्तराल में, दवा की बात करें तो बोरोन बी 20% की 30 ग्राम दवा 20 लीटर पानी में घोलकर पौधों की जड़ों में छिडकाव करें |

अनार का पौधा कितने दिन में फल देता है?

बागवानी में ग्राफ्टिंग विधि से तैयार अनार के पौधे की अच्छी देखभाल होती है, तो अगले साल से अनार लगने शुरू हो जाते है | लेकिन पौधो की शाखांए कम होने के कारण शुरूआती 1-2 साल कम पैदावार देते है | बाग़ में तैयार पौधा 5 वर्ष का पूर्ण रूप से विकशित और अच्छी उपज उत्पादन देने के लिए तैयार हो जाता है |

अनार के पौधे में क्या डालना चाहिए?

किसानो की सबसे बड़ा सवाल रहता है की फूलों के गिरने पर कौनसी दवा का उपयोग करें – तो इसके लिए 3 मिली फ्लोनोफिक्स को 20 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव कर सकते है | समय से सिंचाई का ध्यान रखना और पौधो की जड़ों में पक्की हुई गोबर खाद एव बोरोन दवा दे |

अनार के पेड़ को कैसे बढ़ाएं?

पौधे में पोषक तत्वों की कमी के चलते पौध की बढवार रुक जाती है, इसके लिए – हर पौधे में 200 ग्राम यूरिया, 100 ग्राम डीएपी और जैविक खाद के रूप में पकी हुई 20 किलोग्राम गोबर खाद सालाना दर से डालनी चाहिए |

अनार के फलों में पिलापन की दवा?

किसान भाई अनार के फलों को पीलेपन से दूर करने के लिए NPK उर्वरक की 19:19:19 ग्रेड + मेंकाजेब 63%, WP 35 ग्राम वाली उर्वरक को पानी में घोलकर छिडकाव कर सकते है |

अनार की खेती सबसे ज्यादा कहां होती है?

महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मुख्य रूप से भारी मात्रा में अनार का उत्पादन करते है, जिनका बड़ा हिस्सा विदेशों में भी निर्यात होता है | भारत में 2.09 लाख हेक्टेयर पर अनार की खेती की जाती है | – अनार की खेती pdf

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